Statue Of Unity [ Sardar Vallabhbhai Patel ]

सरदार वल्लभ भाई पटेल / Sardar Vallabhbhai Patel


जीवन परिचय


सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म नडियाद, गुजरात में एक लेउवा/लेवा गुर्जर कृषक परिवार में हुआ था। वे झवेरभाई पटेल एवं लाडबा देवी की चौथी संतान थे। सोमाभाई, नरसीभाई और विट्टलभाई उनके अग्रज थे। उनकी शिक्षा मुख्यतः स्वाध्याय से ही हुई। लन्दन जाकर उन्होंने बैरिस्टर की पढाई की और वापस आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित होकर उन्होने भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया। यद्यपि अधिकांश प्रान्तीय कांग्रेस समितियाँ पटेल के पक्ष में थीं, गांधी जी की इच्छा का आदर करते हुए पटेल जी ने प्रधानमंत्री पद की दौड से अपने को दूर रखा और इसके लिये नेहरू का समर्थन किया। उन्हे उपप्रधान मंत्री एवं गृह मंत्री का कार्य सौंपा गया। किन्तु इसके बाद भी नेहरू और पटेल के सम्बन्ध तनावपूर्ण ही रहे। इसके चलते कई अवसरों पर दोनो ने ही अपने पद का त्याग करने की धमकी दे दी थी।

 गृह मंत्री के रूप में उनकी पहली प्राथमिकता देसी रियासतों (राज्यों) को भारत में मिलाना था। इसको उन्होने बिना कोई खून बहाये सम्पादित कर दिखाया। केवल हैदराबाद के आपरेशन पोलो के लिये उनको सेना भेजनी पडी। भारत के एकीकरण में उनके महान योगदान के लिये उन्हे भारत का लौह पुरूष के रूप में जाना जाता है। सन १९५० में उनका देहान्त हो गया। इसके बाद नेहरू का कांग्रेस के अन्दर बहुत कम विरोध शेष रहा।


 

मुख्य लेख: भारत का राजनीतिक एकीकरण
बारडोली आजादी के बाद


खेडा संघर्ष स्वतन्त्रता आन्दोलन में सरदार पटेल का सबसे पहला और बड़ा योगदान खेडा संघर्ष में हुआ। गुजरात का खेडा खण्ड (डिविजन) उन दिनो भयंकर सूखे की चपेट में था। किसानों ने अंग्रेज सरकार से भारी कर में छूट की मांग की। जब यह स्वीकार नहीं किया गया तो सरदार पटेल, गांधीजी एवं अन्य लोगों ने किसानों का नेतृत्व किया और उन्हे कर देने के लिये प्रेरित किया। अन्त में सरकार झुकी और उस वर्ष करों में राहत दी गयी। यह सरदार पटेल की पहली सफलता थी। बारडोली सत्याग्रह मुख्य लेख: बारडोली सत्याग्रह बारडोली के किसानों के साथ (1928) 

सरदार पटेल ने आजादी के ठीक पूर्व (संक्रमण काल में) ही पीवी मेनन के साथ मिलकर कई देसी राज्यों को भारत में मिलाने के लिये कार्य आरम्भ कर दिया था। पटेल और मेनन ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हे स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। इसके परिणामस्वरूप तीन को छोडकर शेष सभी राजवाडों ने स्वेच्छा से भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। केवल जम्मू एवं कश्मीर, जूनागढ तथा हैदराबाद के राजाओं ने ऐसा करना नहीं स्वीकारा। जूनागढ के नवाब के विरुद्ध जब बहुत विरोध हुआ तो वह भागकर पाकिस्तान चला गया और जूनागढ भी भारत में मिल गया। जब हैदराबाद के निजाम ने भारत में विलय का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया तो सरदार पटेल ने वहाँ सेना भेजकर निजाम का आत्मसमर्पण करा लिया। किन्तु नेहरू ने काश्मीर को यह कहकर अपने पास रख लिया कि यह समस्या एक अन्तराष्ट्रीय समस्या है।।

       गांधी, नेहरू और पटेल

           गांधीजी, पटेल और मौलाना आजाद (1940) 




स्टैच्यू ऑफ यूनिटी/statue of unity


देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे बड़ी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अक्टूबर को उनके जन्म दिवस के दिन करेंगे। 31 अक्टूबर 2013 को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के नर्मदा जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल के एक नए स्मारक का शिलान्यास किया।
यहाँ लौह से निर्मित सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा लगाने का निश्चय किया गया, अतः इस स्मारक का नाम 'एकता की मूर्ति'(स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) रखा गया है। यह मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी'93 मीटर) से दुगनी ऊंची बनेगी। इस प्रस्तावित प्रतिमा को एक छोटे चट्टानी द्वीप पर स्थापित किया जाना है जो केवाड़िया में सरदार सरोवर बांध के सामने नर्मदा नदी के बीच स्थित है। स्थापित हो जाने पर सरदार वल्लभ भाई पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची धातु मूर्ति होगी, जो 5 वर्ष में लगभग 2500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होनी है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी182 मीटर (597 फीट) ऊँचा गुजरात सरकार द्वारा प्रस्तावित भारत के प्रथम उप प्रधानमन्त्री तथा प्रथम गृहमन्त्री सरदार पटेल का स्मारक है। गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2013 को सरदार पटेल के जन्मदिवस के मौके पर इस विशालकाय मूर्ति के निर्माण का शिलान्यास किया। यह स्मारक सरदार सरोवर बांध से 3.2 किमी की दूरी पर साधू बेट नामक स्थान पर है जो कि नर्मदा नदी पर एक टापू है। यह स्थान भारतीय राज्य गुजरात के भरूच के निकट नर्मदा जिले में है।
वर्तमान में विश्व की सबसे ऊँची स्टैच्यू या मूर्ती 152 मीटर की चीन में स्प्रिंग टैम्पल बुद्ध है। उससे कम दुसरी ऊँची मूर्ति भी तथागत बुद्ध की ही है जिसकी उँचाई 120 मीटर है। बुद्ध की यह मूर्ति सन् 2008 में म्याँमार सरकार ने बनवायी थी।और विश्व की तिसरी सबसे ऊँची मूर्ती भी जापान में भगवान बुद्ध की हैं, इस बुद्ध मुर्ती की ऊँचाई 116 मीटर हैं।

 निर्माण

     




लौह पुरुष सरदार पटेल, जिनकी स्मृति में यह विशाल स्मारक लोहे से ही बनाया जायेगा। गुजरात सरकार द्वारा 7 अक्टूबर 2010 को इस परियोजना की घोषणा की गयी थी। घोषणा में यह बताया गया कि प्रस्तावित स्मारक की कुल ऊँचाई आधार से लेकर शीर्ष तक 240 मीटर होगी जिसमें आधार तल की ऊँचाई 58 मीटर रहेगी और प्रतिमा 182 मीटर ऊँची होगी। प्रतिमा का निर्माण इस्पात के फ्रेम, प्रबलित सीमेण्ट कंक्रीट और काँसे की पर्त चढ़ाकर किया जायेगा। टर्नर कन्स्ट्रक्शन, जो बुर्ज ख़लीफ़ा के सलाहकार थे, उन्हीं के सहयोगी संगठन- माइकल ग्रेव्स एण्ड एसोशिएट्स एवं मीनहार्ड ग्रुप दोनों मिलकर पूरी परियोजना की निगरानी करेंगे। परियोजना को पूरा होने में 56 सप्ताह का समय लगेगा जिसमें लगभग 15 महीने योजना, 40 महीने निर्माण तथा 2 महीने सहयोगी संगठनों द्वारा इसके हस्तान्तरण की प्रक्रिया में लगेंगे। पूरी परियोजना में प्रतिमा और अन्य भवन, जिनमें स्मारक, आगन्तुक केन्द्र, बाग, होटल, सभागार,
मनोरंजन-उद्यान तथा शोध संस्थान आदि सभी शामिल हैं, की कुल लागत 2500 करोड़ रुपये होगी।

विश्व का सबसे ऊँचा स्मारक


भरूच में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के साथ नरेन्द्र मोदी ने परियोजना की आधार शिला रखने के बाद जनता को बताया कि इस स्मारक के निर्माण हेतु राशि जनता सार्वजनिक प्रतिष्ठानों से दान प्राप्त करके जुटायी जायेगी। उन्होंने यह भी बताया कि पूरी तरह से बन जाने के बाद यह विश्व का सबसे ऊँचा स्मारक होगा। सरदार पटेल की प्रतिमा बनाने के लिये लोहा पूरे भारत के गाँव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया जायेगा।[9] सरदार बल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट ने इस कार्य हेतु पूरे भारतवर्ष में 36 कार्यालय खोले हैं।[9] लोहा एकत्र करने का काम निर्माण प्रारम्भ होने की तारीख (26 जनवरी 2014) से पहले ही पूरा कर लिया जायेगा.

अहमदाबाद। सरदार वल्लभभाई पटेल की 137वीं जयंती के मौके पर उनकी एक मूर्ति की नींव डाली गई। यह मूर्ति जिसे स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का नाम दिया गया है, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा होगी। अगर आपके मन में अमेरिका के स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी रहा है

पटेल की यह प्रतिमा गुजरात में बहने वाली नर्मदा नदी के बीच स्थित एक टापू पर बनायी जाएगी, जिसमें करीब 2063 करोड़ रुपए का खर्च आयेगा। इस प्रस्तावित मूर्ति का निर्माण अगले चार वर्ष में पूरा हो जायेगा। इस मूर्ति के निर्माण में लोहे और कॉन्क्रीट सीमेंट का इस्तेमाल किया जायेगा और ऊपर से कांस्य की कोटिंग की जायेगी। गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है और उन्होंने इस मूर्ति के लिये देश भर से लोहा इकठ्ठा करने की बात कही है।


इस मूर्ति के लिये लोहे को गांव-गांव से एकत्र किया जायेगा। एक गांव से लोहे का एक टुकड़ा इकठ्ठा किया जा रहा है, जिसका भार एक किलो से ज्यादा नहीं होगा, ताकि यह मूर्ति किसानों के खून पसीने की याद दिलाये और देश भर के किसानों के एक होने का प्रतीक बने। देश भर से जितना लोहा इकठ्ठा होगा, उसे पिघला कर मूर्ति में लगाया जायेगा। जिन किसानों के लोहे के टुकड़े लगाने लायक नहीं होंगे, उन्हें मूर्ति के चारों ओर बनाये जाने वाले परिसर में लगा दिया जायेगा। अगर कम पड़ा तो स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया से लोहा लिया जायेगा।
इस मूर्ति के साथ-साथ सरदार सरोवर निगम परियोजना के अंतर्गत उसी क्षेत्र में करीब 400 फुट ऊंचा एक डेक बनाया जायेगा, जहां पर एक साथ 200 लोग खड़े होकर इस मनोरम दृश्य का लुत्फ उठा सकेंगे। उस डेक से सत्पुड़ा और विंध्याचल के पहाड़ों का भी नजारा देखने को मिलेगा।


हम आपको बता दें कि भारत में अब तक की सबसे ऊंची मूर्ति भगवान बजरंग बली की विजयवाड़ा आंध्र प्रदेश में है। उसकी ऊंचाई 41 मीटर यानी 135 फुट है। इस मूर्ति का निर्माण 2003 में किया गया था। 


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